*मुंशी प्रेमचंद जी* का हिन्दी सहित्य में योगदान किसी परिचय का मोहताज नहीं है, मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती के उपलक्ष में विगत दिवस 31 जुलाई को *स्वैच्छिक शिक्षक समूह* द्वारा *अज़ीम प्रेमजी फाऊंडेशन, कोटद्वार* के सभागार में एक लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसके *मुख्य वक्ता प्रो नंदकिशोर ढौंडियाल"अरुण"* जी थे। आप एक *वरिष्ठ साहित्यकार* के साथ-साथ महाविद्यालय कोटद्वार के *हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष* भी रहे।
प्रेमचंद जी के सहित्यिक संदर्भ और उसके आलोक में वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुये नंदकिशोर जी ने आपने विचार सभी उपस्थित शिक्षक साथियों के साथ साझा किये।
नंदकिशोर जी ने बताया की प्रेमचंद जी को हम 4 रुपों में देख सकते हैं, वे केवल कथाकार और उपन्यासकार ही नहीं वरन एक शिक्षक और सम्पादक भी थे। उनके जीवन के प्रत्येक पक्ष का प्रभाव उनकी रचनाओं में देखने को मिलता है, जिसको उदाहरणो के साथ नंदकिशोर जी ने सत्र में शिक्षकों के सामने रखा।
इस कार्यक्रम में राजीव थपलियाल, सरिता मैंदोला,अमित गोयल,सौरभ सिंह, अंजलि शंकर,जागृति कुकरेती, भारती नेगी, लक्ष्मी नैथानी,अनुराग तिवारी,पंकज शुक्ला, मनमोहन सिंह नेगी, शैलजा जोशी,संगीता बिष्ट,श्रुतिका,अल्का बिष्ट,सुरेश बिष्ट, यशपाल बिष्ट, सुधा बलोधी, दिनेश बिष्ट, रिद्धि भट्ट,चन्द्रजीत सिंह बिष्ट,आदि उपस्थित रहे।

